21+ Beautiful Mother Poem in Hindi | माँ पर हिंदी कविताएँ

Beautiful Mother Poem in Hindi: दोस्तों आज आप सबको बहुत ही खूबसूरत maa par kavita सुनाने जा रहा हूँ |
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maa par Kavita

यह कविताएँ आपके दिल को छू जाएगी और एक ऐसी कविता के माध्यम से हमने आपको बताया है, की कैसे माँ में ही पूरा जीवन का अर्थ समाया हुआ है और किस तरह जन्नत के सुख से भी ज्यादा सूंदर माँ के साथ का सुकून है |

माँ पर कविताएँ लिखना आसान नहीं है, मैंने कुछ कोशिश की है मेरी लिखी हुई कविताएँ माँ पर इन्हे पढ़िए और अगर आपको पसंद आये तो इन्हे शेयर करे |


    * सेवा करो प्यारी मां की
    जीवन का हर शून्य खत्म हो जाएगा
    अपमान मत करो मां का
    वरना जीवन का हर पूण्य खत्म हो जाएगा

    * हर घड़ी हर पल को खास लिख देती है
    माँ औलाद के नाम अपने सारे अहसास लिख देती है
    बड़ा होकर जो सपूत लिख ना पाता चार रोटियां भी
    माँ उसी औलाद के नाम अपनी हर साँस लिख देती है

    * कोई तराना दुआओं का मेरी खातिर भी गा देना
    हो सके तो हे प्रभू, मुझे तू अगले जन्म में माँ बना देना

    * यूं भी कभी किस्मत संवारा करो
    माँ तो उतारती है रोज
    तुम भी कभी माँ की नजरें उतारा करो

    * यकीनन जन्न्त से भी खूबसूरत माँ की झोली होती है
    थक जाती है जब किस्मत काम करके,वो भी माँ की झोली में सोती है

    * जमीन पर जन्नत से मुलाकातें कर रहा हूँ
    थोड़ी देर में आना किस्मत,अभी मैं माँ से बातें कर रहा हूँ

    * सो जाती रात भी,थक कर
    पर माँ जागकर औलाद की राह तकती है
    माँ से महान कोई हो ही नही सकता
    माँ बीमारी में भी,परिवार की सलामती के व्रत रखती है

    * चूर चूर होकर ना जाने कहाँ दफन हो जाती है
    जब भी कोई बददुआ मेरी माँ की दुआ से टकराती है
    लोग तो सो ना पाते है नरम बिस्तर की बाहों में चैन से
    मुझे तो माँ की गोदी में जमीन पर ही नींद आ जाती है

    * रहता है किस्मत में हमेशा सवेरा
    कभी ना रात होती है
    हर काम खुद ब खुद बनता चला जाता
    माँ की दुआएं जब साथ होती है

    * किस्मत कदमों में पड़ी होती है
    जब माँ औलाद संग खड़ी होती है

    * समझ कर उसके दर्द को
    मुझे भी बेदर्द दर्द सता चला
    दर्दों में कैसे मुस्कुराया जाता है
    ये खुद माँ होकर पता चला

    * मां के रूप में छुपी हर सजावट होती है
    मां के प्रेम में कभी ना मिलावट होती है
    रहती है जिस जिस भी घर में सुख से माएं
    वहां हर पल देवों के आने की आहट होती है

    * कितनी गजब शख्सियत है मां समझो जरा
    लाख गुस्से में हो पर रोटियां मीठी ही बनाती है

    * वर्षों सुलगती रहती है वो जमीनें
    जहां जहां भी माँ की निर्दोष
    आंखों से टपके आंसू गिरते हैं

    * क्या क्या खाया मां के हाथ से
    कुछ भी तो नही है याद
    क्योंकि हर चीज से ज्यादा लाजवाब था
    मां की उंगलियों का स्वाद

    * अपने हिस्से आई चन्द खुशियां भी
    औलाद की झोली में डाल देती है
    कितनी भी चाहे गरीब क्यूं ना होI
    फिर भी माँ बच्चों को पाल देती है

    नीरज रतन बंसल'पत्थर'
    हम सब अपनी अपनी माँ से दिल की गहराई से प्रेम करते है, यह कोई कहने वाली बात नही…!

    'माँ' कहने को तो यह शब्द बहुत छोटा है, मगर इस शब्द की गहराई को दुनिया में कोई नाप नही सकता है |

    Maa par kavita: जमीन पर जन्नत ( माँ )

    जमीन पर जन्नत मिलती है कहाँ
    दोस्तों ध्यान से देखा करो अपनी माँ

    जोड़ लेना चाहे लाखों करोड़ो की दौलत
    पर जोड़ ना पाओगे कभी माँ सी सुविधा

    आते हैं हर रोज फरिश्ते उस दरवाजे पर
    रहती है खुशी से प्यारी माएं जहाँ जहाँ

    छिन लाती है अपनी औलाद की खातिर खुशियाँ
    कभी खाली नही जाती माँ के मुहं से निकली दुआ

    वो लोग कभी हासिल नही कर सकते कामयाबी
    जो बात बात पर माँ की ममता में ढूँढते है कमियां

    माँ की तस्वीर ही बहुत,बड़े से बड़ा मन्दिर सजाने को
    माँ से सुंदर दुनिया में नही होती कोई भी प्रतिमा

    माँ का साथ यूँ चलता है ताउम्र आदमी संग
    जैसे कदमों तले झुका रहता हो सदा आसमां

    माँ दिखती तो है जिस्म के बाहर सदा
    पर माँ है रूह में मौजुद बेपनाह होंसला

    कभी गलती से भी बुरा ना सोचना माँ के बारे में
    ध्यान रहे माँ ने ही रचा हर जीवन का घोंसला

    मर कर भी बसी रहती है माँ धरती पर ही अ नीरज
    कभी नही होता औलाद की खातिर उसके प्रेम का खात्मा

    नीरज रतन बंसल `पत्थर`

    चाहे हम दुनिया के लिए कुछ भी मायने नही रखते | पर हर एक इंसान अपनी माँ के लिए खास होता है |

    एक औरत का ही दिल इतना बड़ा होता है, वह अपने माता पिता को छोड़ कर एक नई ज़िन्दगी मे डलती है, और अपनी ज़िन्दगी अपने बच्चे और अपने परिवार के लिए समर्पित कर दे और बदले में सिवाए प्यार के और कुछ ना मांगे वो सिर्फ एक माँ ही हो सकती है।

    अपनी माँ को याद करते हुए, अपनी माँ के प्यार में आज मै आपके साथ माँ को समर्पित कविता का लेख प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जो इस प्रकार है:

    मेरी माँ के लिए ⇓



    Maa Par Kavita in Hindi: आबशारों-झरने

    खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर, अपनी आँख के इशारों से
    माँ क्या शै होती, पूछ लेना कभी ये बात तुम प्यारी बहारों से
    नही जरूरत माँ के रहते किसी और चाहत की हमें जमाने में
    भीगे रहते है हम तो सदा, माँ की ममता के हसीन आबशारों से

    माँ की दुआ तो हर हाल में कबूल होती है
    माँ के रहते जन्नत जमीन पर वसूल होती है
    फरिश्ते भी जिसकी चाहत पाने को तरसते
    माँ तो वो अदभुत अनोखा प्यारा फूल होती है
    तुम से ज्यादा है कौन चमकीला,पूछ लेना ये बात तुम सितारों से
    खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर,अपनी आँख के इशारों से

    माना माँ की बोली कभी कभी कड़वी,खारी होती है
    पर माँ हर गुड़ शक्कर,हर मीठे से प्यारी होती है
    चाहे अनपढ़ ही क्यूं ना हो कोई भी माँ जमीन की
    पर उसकी सीखों में जीवन जीने की बात छुपी सारी होती है
    सुंदर होती है हर माँ तो,जमीन के हसीन से हसीन नजारों से
    खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर,अपनी आँख के इशारों से

    माँ तो जीती है हजारों सदियों तक,वो कभी भी ना मरती है
    माँ हर रूह में,हर धड़कन में जीवन जीने का हौसला भरती है
    हर देवता से बहुत ज्यादा बड़ी होती है माँ की शख्सियत,समझो इसे
    रब भी वो कर नही सकता, जो औलाद की खातिर माँ करती है
    बचा लेती है माँ अपनी औलाद को दुःख दर्द के बेदर्द अंगारो से
    खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर, अपनी आँख के इशारों से
    माँ क्या शै होती पूछ लेना कभी ये बात तुम प्यारी बहारों से
    नही जरूरत माँ के रहते किसी और चाहत की हमें जमाने में
    भीगे रहते है हम तो सदा, माँ की ममता के हसीन आबशारों से

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर

    Maa poem in hindi : माँ मतलब परछाई

    माँ के होते कभी नही होती जीवन में कठिनाई है
    माँ ताउम्र बनकर रहती अपनी औलाद की परछाई है

    दिखता है जिसमे केवल स्नेह माँ तो वो नजर है
    कभी नही मरती कोई भी माँ, वो तो परी अजर अमर है

    लोक परलोक की, माँ ही होती है सबसे खूबसूरत आत्मा
    माँ के कदमों में सदा झुका रहता है पूर्ण परमात्मा

    माँ ही धरा पर जीवन लिखने वाली अनोखी कलम है
    समझो औरत का जन्म ही धरा पर जीवन का जन्म है

    माँ राहत,माँ चाहत,माँ पहचान,माँ ही सम्मान है
    माँ जरूरत,माँ मूरत, माँ निदान, माँ ही अभिमान है

    माँ जमीन पर रहकर जन्नत का अहसास दिलाती है
    माँ छोटे परिंदों को हौसलों का बड़ा आकाश दिलाती है

    माँ सितार,माँ बहार माँ ही देवों की अदभुत बोली है
    माँ अधिकार,माँ प्यार, माँ कंगन, माँ ही चंदन रोली है

    माँ सदा सुखों से कराती अपनी औलाद की मुलाकात है
    पहुंचाती जो रूह को सकून माँ वो चांदनी रात है

    जो महकाती सांसो को माँ की चाहत वो कस्तूरी है
    जिस पर है सारी धरा आश्रित माँ ही वो धुरी है

    माँ का प्रेम ही दुनिया का सबसे सुगंधित चन्दन है
    नीरज की ओर से हर माँ को शत शत वन्दन है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    अन्य लेख ⇓



    Maa par kavita in Hindi: हर एक साँस की कहानी है तू

    हर एक साँस की कहानी है तू
    परी कोई प्यारी आसमानी है तू
    जीती मरती है तू औलाद की खातिर
    सिर्फ ममता की भूखी दीवानी है तू

    तेरी गोदी से बढकर नही कोई भी चमन
    हमेशा फरिश्तों से घिरा रहता था तन
    गुजरा है तेरे संग हर लम्हा जन्नत में
    ताउम्र महसूस होती रहेगी तेरी चाहतों की तपन
    इश्क करना फितरत है तेरी
    हर देवता की जानी पहचानी है तू

    तू अदभुत साँस बनकर जिस्म को महकाती
    हसीन जन्नत खुद तेरे करीब आ जाती
    अजीब कशिश है तेरी चाहतों में माँ
    तू रोते बालक को पल में हंसाती
    कोई नही तुझसे बढकर खुबसुरत जग में
    हजारों परियों की रानी है तू

    दुआ है तेरी कोख से हो हर बार जन्म
    भूलकर भी कभी ना हो तुझे कोई गम
    तुझ जैसा कोई और चाह नही सकता
    तू ही सच्ची दिलबर तू ही सच्ची हमदम
    हर करिश्मे से है तू बड़ी
    खुदा की जमीन पर मेहरबानी है तू

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    माँ पर कविता: तू ही मेरी जमीन, तू ही मेरा आकाश

    अ माँ जब भी तू रहती ख्यालों के आसपास है
    हर पल होता रूह को जन्नत का अहसास है
    तेरे होते कैसे पूजूं में किसी और देव को
    तू ही मेरी जमीन,तू ही मेरा आकाश है

    तेरे आशीषों से खुल जाती कामयाबी की राहें
    चाहे कितना मर्जी दूर हूँ,मुझे देखती रहती तेरी निगाहें
    मैं नही समर्थ कुछ भी पाने को अ प्यारी माँ
    पर सबकुछ दिला देती मुझको,तेरी सच्ची दुआएं
    लेता है जो भी जग सारा,तेरा दिया हुआ वो हर एक साँस है
    अ माँ जब भी तू रहती ख्यालों के आसपास है

    बिन तेरे अ माँ,मेरे जीवन की किताब कोरी है
    जो सुला देती नींद चैन की,सिर्फ तेरे पास वो लोरी है
    तू अ माँ हर हसीन जन्नत से प्यारी है
    जो महकाती घर आँगन को,तू अ माँ वो फुलवारी है
    आ जाता बहारों में भी मौसम पतझरों का,जब भी तू हो जाती उदास है
    अ माँ जब भी तू रहती ख्यालों के आसपास है

    रूप सलोना है तेरा सबसे,सबसे सुरत है तेरी भली
    तुझे देखते ही खिल जाती,मुरझाई हुई हर एक कली
    तेरी गोदी से दुनिया की हर एक जन्नत नजर आती
    तेरा अहसास है माँ,नर्म गलीचों सा सुन्दर मखमली
    जिसकी चाह में भटके फरिश्तें, तू ही तो वो अरदास है
    अ माँ जब भी तू रहती ख्यालों के आसपास है
    हर पल होता रूह को जन्नत का अहसास है
    तेरे होते कैसे पूजूं में किसी और देव को
    तू ही मेरी जमीन,तू ही मेरा आकाश है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa par Kavita: अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    सींचती हर पल घर आँगन को तू बरसात बनकर
    बसती जर्रे जर्रे में घर के,तू अदभुत सौगात बनकर
    रहती है जहां जहां भी तू,रहती है वहां सदा रौनकें
    महकाती घर आँगन को तू सदा जगमगाती     बारात बनकर
    रब की जमीन को तू सबसे बड़ी इबादत है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    तू ही धरा पर हर साँस की तकदीर है
    बांधे रखती जो सम्बन्धों को,तू ही वो जंजीर है
    जिस जिस के पास भी रहती है सुख से माँ
    दुनिया में वो सबसे ज्यादा खुशकिस्मत,अमीर है
    बेवकूफ है वो तो,जिसे तुझसे भी रहती शिकायत है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    अ माँ तू ही जमीन को जन्नत से मिलाती
    तू ही औलाद को जीने की सही राह सिखाती
    तेरे रहते नही जरूरत,जन्नत को ढूंढने की
    तू जहां होती हसीन जन्नत, खुद वहीं पर आ जाती
    मिली है उसको हर ख़ुशी जमीन पर,जिसे तेरी आशिकी की लत है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    अ माँ तू ही घर के कोने कोने में,खुशियां बोती है
    संतान रहे सदा सुख चैन से,इसलिये तू कभी ना चैन से सोती है
    और वहां किस्मत कभी नही बनाती अपना डेरा
    जिस जिस जगह पर भी तेरी अनमोल आँखे रोती है
    पढ़ने को तरसते जिसे फरिश्ते भी,माँ तू तो वो खत है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    माँ के आशीर्वाद से कभी जीवन में कोई कमी नही होती
    माँ के जो करीब रहते,उनकी आँखों में कभी नमी नही होती
    माँ का साथ क्या होता है,अब क्या बताऊँ मैं'नीरज' सबको
    माँ के कदम जहां भी पड़ते,वो जमीनें जन्नत होती,सिर्फ जमीं नही होती
    माँ को कभी गलत मत समझो,जो बरसाती सदा रहमतें माँ तो वो छत्त है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है
    अ माँ तेरा ही नाम तो चाहत है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Mother Poem in Hindi: जय माँ सरस्वती

    अज्ञानता से भरा है जिस्म
    तू ज्ञान की रोशनी दे
    दी हुई है तेरी हर एक साँस
    ताउम्र की तू बन्दगी दे
    करते रहे हम, नादान बालक
    ताउम्र सच्चे हृदय से तेरी सेवा
    बहुत जी लिये अपनी खातिर
    जी सकें वतन के लिये,ऐसी जिंदगी दे
    रच सके कोई इतिहास नया, दे दे ऐसी मति
    माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती

    ये धन दौलत, ये समझबुझ, ये समृद्धि
    सबकुछ दिया हुआ है तेरा
    जिस जिस ने भी पूजा है तुझको दिल से
    उसको कभी ने विपत्तियों ने घेरा
    तुझसे ही रोशन रूह का हर कण
    तुझसे ही है कदमों में गति
    माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती

    हर एक मन पर अ माँ शारदे
    तेरी कृपा गहरी है
    तू ही देती बातों को दिशा
    तू ही ख्यालों की प्रहरी है
    हर कार्य उसका स्वयं हो जाता
    जो करता है तुझसे प्रीति
    माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती

    कर सकें निस्वार्थ भाव से तेरी आराधना
    हमको तू ऐसा वर दे
    लिखते जायें हर पन्ने पर देशप्रेम
    ऐसी सोच तू हर हृदय में भर दे
    कर दे कोई चमत्कार ऐसा
    हर रूह से टपके देशप्रेम,हे ज्ञानवती
    माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती, माँ सरस्वती

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa Pe Kavita in Hindi: माँ मलमल है

    सारी कायनात अ माँ तेरे कदमों तले झुकती है
    छींक भी तुझे आ जाती, तो कुछ देर के लिये जिंदगी रूकती है
    तुझ जैसा सांसो का रखवाला कोई हो ही नही सकता
    क्योंकि औलाद को संभाले, कभी ना तेरी बाहें थकती है

    माँ ही शीतल चन्दन, माँ ही नर्म मलमल है
    प्यारी माँ में सौ हाथियों से ज्यादा बल है
    माँ की दी हर एक सीख, जिंदगी को सरल बनाती
    क्योंकि माँ की कही हर बात, फरिश्तों सी अटल है

    माँ ही अदभुत जमीन, माँ ही दयालु फलक है
    जो दिखाती सदा सुख के नजारे, माँ वो पलक है
    डरने की जरूरत नही जीवन में किसी डर से
    हर साँस है महफूज, माँ करीब जब तलक है

    तेरे होने से ही सुगन्धित घर का कोना-कोना है
    तेरा ना होना जिंदगी में,किसी तजुर्बे की खान का खोना है
    तेरी सेवा ही समझो, घर आँगन में मोती बोना है
    तेरे आँचल की छावं में सोना ही जन्न्त में सोना है

    जो लुटाता हर बार रहमतें माँ वो भगवान है
    माँ से ही होती धरा पर ममता की पहचान है
    हर शब्द कम है तेरी तारीफ को, अ शब्द माँ
    जो बचाता धरा पर जीवन को, माँ तो वो वरदान है

    दुःखो से सुलगती रूह को माँ, लेप राहत का लगाती
    औलाद की छोटी से छोटी चोट पर माँ, हजारों मोती बहाती
    माँ की दुआ ले आती देवों को जमीन पर खींचकर
    औलाद को सुखी देखने के लिये माँ हर दुःख को हंसते हंसते सह जाती

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa Pe Kavita: एक एक बात तेरी चित ने भावे से

    एक एक बात तेरी चित ने भावे से
    देख के तन्ने माँ, मन का मयूर जाग जावे से
    करे से सेवा तू माँ, प्राणा की दिन रात
    जिस्म पहुंच जावे जन्नत में, जब भी तू गावे से

    जल्दी उठ के सारे घर ने सम्भाती
    सबने खिला के सब ते आखर में खाती
    रहे परिवार सदा सुख ते ख़ुशी में
    इस खातर माँ तू रोज मन्दर भी जाती

    जिस जिस घर में रहवे से सुख ते माँ
    सुना है उस घर में रोज देवों की आहट आवे से
    एक एक बात तेरी चित ने भावे से
    काम कर कर कदै भी माँ थकती कोना

    तेरी सेवा ते बड़ी माँ, जग में कोई भक्ति कोना
    कद्र ना करे यो जमाना तेरी अलग बात से
    वरना तेरे ते बड़ी जग में कोई शक्ति कोना
    थर थर कापन लागते सारे भुत पिशाच

    जब भी ऐ माँ तू अपना दुर्गा रूप दिखावे से
    एक एक बात तेरी चित ने भावे से
    माँ मेरी तू ही जग में ममता की मूरत से
    तू तो माँ प्यारी जन्नत ते भी खूबसूरत से

    चाहे मर्जी मिल जावे कितनी ए सुविधा जग में
    फिर भी सांसे ने रहवे हरवक्त तेरी जरूरत से
    आ जाये पतझड़ में भी मौसम बहारा का
    जब भी तू अपना आँचल हवा में लहरावे से
    एक एक बात तेरी चित ने भावे से
    देख के तन्ने माँ,मन का मयूर जाग जावे से

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa Poem in Hindi: *जमीन पर जन्नत मां

    maa par kavita in hindi
    maa par kavita in hindi

    जमीन पर जन्नत मिलती है कहाँ
    दोस्तों ध्यान से देखा करो अपनी माँ
    जोड़ लेना चाहे लाखों करोड़ो की दौलत
    पर जोड़ ना पाओगे कभी माँ सी सुविधा

    आते हैं हर रोज फरिश्ते उस दरवाजे पर
    रहती है खुशी से प्यारी माएं जहाँ जहाँ
    छिन लाती है अपनी औलाद की खातिर खुशियाँ
    कभी खाली नही जाती माँ के मुहं से निकली दुआ

    वो लोग कभी हासिल नही कर सकते कामयाबी
    जो बात बात पर माँ की ममता में ढूँढते है कमियां
    माँ की तस्वीर ही बहुत,बड़े से बड़ा मन्दिर सजाने को
    माँ से सुंदर दुनिया में नही होती कोई भी प्रतिमा

    माँ का साथ यूँ चलता है ताउम्र आदमी संग
    जैसे कदमों तले झुका रहता हो सदा आसमां
    माँ दिखती तो है जिस्म के बाहर सदा
    पर माँ है रूह में मौजुद बेपनाह होंसला

    कभी गलती से भी बुरा ना सोचना माँ के बारे में
    ध्यान रहे माँ ने ही रचा हर जीवन का घोंसला
    मर कर भी बसी रहती है माँ धरती पर ही अ नीरज
    कभी नही होता औलाद की खातिर उसके प्रेम का खात्मा

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa Par Kavita: *घर में भगवान

    देखकर मंदिर में भगवान की मूरत
    सुकून मिल गया बेचैन मन को
    घर में पड़े लाचार बेबस बूढ़े माँ बाप
    ये मर क्यूं नही जाते

    भूल जाते है लोग अहसान किसी के
    बेरहम दुनिया जाने क्यूं गलत बातें सिखाती है
    बिना बोले ही समझ जाती थी माँ तो सारी बातें
    आज जवान होकर वही कहता है के माँ तू कुछ समझती ही नही

    पड़े रहते है रात रात भर बाँहों में बाहें डाले
    खांसते बाप की आवाजें जान बुझ कर सुनते नही
    खुद की औलाद गलती से गिर जाये अगर
    तो बेटा तुझे कहीं चोट तो नही लगी

    बिना दांतों का इंसान मांग रहा है कई दिनों से भीख की तरह दांत
    बीबी की क्रीम पाउडर की ख्वाइश पहली
    बार में पूरी हो जाती है
    बगैर जरूरत के भी चीजें आ रही है घर में
    घर का असली मालिक कुत्तों सी जिन्दगी जीने को मजबूर है

    कोई चीज मांगने पर आँखे दिखाता है लाडला
    शायर सालों सींच कर इसीलिये ये आँखे बड़ी की थी
    अरे लोगों जिस रस्ते से जा रहे हो शहर से बाहर
    याद रखना वही रस्ता घर को उल्टा भी आता है

    माँ बाप का खाना पीना सिमित कर दिया बीबी के कहने पर
    अपने सालों की खातिर मिठाई की दुकान खरीदी जा रही है
    गलतफहमी में ना जाने क्यूं जी रहे हैं अधिकतर लोग
    शौचालय को मन्दिर समझ बैठे है सारे,धत्त

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa par Kavita: * मां की खुशबू

    माँ के आँचल के आसपास कभी भी बेरहम लू नही आती
    मुर्ख है वो लोग तो जिन्हें माँ के किरदार से खुशबू नही आती

    फैंक आते है माँ बाप को वृद्धाश्रम जबरदस्ती लावारिस बना कर
    पर माँ बाप को कभी भी लावारिस औलाद में भी बदबू नही आती

    मैं तो मांगता हूँ हर बार रब से रहमतें मजबूरों की खातिर
    अपने जहन में खुद के लिये मांगने को कोई भी जुस्तजू नही आती

    जो अमीर जुड़े है जमीन से,कभी भी पीछे नही हटते किसी की मदद को
    कभी भी उनकी बातों से अमीरी की गंदी,मतलबी बू नही आती

    गुजर जाता है हर वो दिन सकून से,चैनो अमन से,आराम से अपना
    जिस दिन अ मेरी हसीन दिलरुबा ख्यालों में तू नही आती

    कहते है लोग के नीरज बिन उर्दू वजन नही आता शायरी में
    अरे हम लिखते है तबाही,जबकि हमको भाषा उर्दू नही आती

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Mother Poem in Hindi: *सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    कुछ भी नही माँ बिन धरा पर सम्भव
    माँ का तो होता है देवों पर भी प्रभुत्व
    सबकुछ धरा पर है माँ की ही बदौलत
    होती है जीता जागता एक अदभुत करिश्मा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    रोते बालक को पल भर में हंसाती
    बैठाकर अपनी गोदी में जन्नत घुमाती
    सिर्फ कहने को होती है एक अक्षर की
    पर खुद में छुपाये होती है सारा जहां
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    जीवन की हर ऊंच-नीच सिखाती
    गलत सही की पहचान बताती
    पल में समझ जाती बालक के इशारों को
    मूक बालक की होती है अदभुत जुबां
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    माँ की बाहें तो जन्नत की गली है
    हर जिंदगानी वहां सदा मौजों में पली है
    हर इच्छा बोलते ही पूरी वो करती
    होती छोटी सी उम्मीद का बड़ा आसमां
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    धरा पर माँ ही होती भगवान इकलौती
    विशाल कुदरत भी माँ की गोदी में सोती
    हल्के से छू कर बड़े से बड़े गम को
    सैकंडों में कर देती सारे दुखों का खात्मा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    माँ को होती अपनी औलाद प्यारी
    सिर्फ अपने बच्चों की खातिर जीती बेचारी
    बड़े से बड़ा जुर्म कर दे चाहे औलाद
    कर देती क्षण में उसको हंसकर क्षमा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    माँ को समझो सब जहानों की छाया
    उससे बढ़कर पवित्र नही कोई और काया
    चाहे मत पूजो किसी भी और देवता को
    पर मन मंदिर में जरूर हो माँ की प्रतिमा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    ब्रह्मा विष्णु महेश सब माँ में समाये हैं
    अपनी देह में उसने तीनों लोक छुपाये हैं
    चाहे मर भी जाये कोई माँ प्यारी
    पर अपने बच्चों पर नजर रखती है उसकी आत्मा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    करना सीखों लोगों सदा माँ की कद्र
    वरना लग जाएगी तुम्हारी खुशियों को नजर
    समझो दिल से धरा पर माँ के महत्व को
    उससे बढ़कर नही होती कोई भी सुविधा
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    माँ से तो भयंकर काल भी डरता है
    जन्नत वही पाता जो माँ की सेवा करता है
    जो गुण चाहिये मांग लो उससे जीते जी
    वरना तो बाद में हो जाएगा सबकुछ धुआं
    सचमुच परमात्मा की आत्मा होती है माँ

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

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    Maa Kavita: *मां धरती की जिंदगानी

    आँखों में ममता का सागर
    बातों में जीवन कहानी है
    माँ सिर्फ शब्द नही कोई
    माँ तो धरती की जिंदगानी है

    रहकर माँ के करीब
    भर जाता हर एक घाव है
    जन्नत के हर सुख से सुन्दर
    माँ के आंचल की छांव है

    पूछो माँ से राहें कामयाबी की
    हर राह उसकी जानी पहचानी है
    आँखों में ममता का सागर
    बातों में जीवन कहानी है

    माँ ही है जो धरती पर
    जीवन का निर्माण करती है
    सहते सहते हर दुःख को
    ना जीने कितनी बार जीती मरती है

    हर फरिश्तें से माँ होती है बड़ी
    माँ तो कोई चमत्कार रूहानी है
    आँखों में ममता का सागर
    बातों में जीवन कहानी है

    माँ सबसे ऊपर विराजित
    माँ से जग में, नही कोई बड़ा
    माँ है सबसे अदभुत ताजमहल
    माँ है मुकुट कोई,कोहिनूर जड़ा

    कुछ न मांगे रब से,खुद की खातिर
    माँ तो सिर्फ औलाद के सुख की दीवानी है
    आँखों में ममता का सागर
    बातों में जीवन कहानी है

    जो महकाता घर के हर कोने को
    माँ वो सुगन्धित इत्र है
    बेहिचक बता सकते जिसे सारे राज
    माँ वो शानदार मित्र है
    माँ का नाम ही सहजता, सुलभता
    माँ का नाम ही आसानी है

    आँखों में ममता का सागर
    बातों में जीवन कहानी है
    माँ सिर्फ शब्द नही कोई
    माँ तो धरती की जिंदगानी है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'
                 दोस्तों उम्मीद करता हूँ यह maa par kavita in hindi आपको बहोत पसंद आयी होगी |

                अगर एक वाक्य में कहें तो माँ ही पुरे जीवन का अर्थ है, और माँ धरती पर साक्षात ईश्वर का रूप है | माँ के ही दिल में वह प्यार होता है जो किसी मतलब का मोहताज नहीं होता |

                वरना आजकल तो जीवन में हर रिश्ता सिर्फ मतलब से ही निभाया जाता है | दोस्तों अपने कमैंट्स करके हमें जरूर बताइये की यह maa pe kavita आपको कैसी लगी |

     यदि आप भी हमें अपनी कविता (maa par kavita)भेजना चाहते हैं तो निचे दी गयी इ-मेल पर भेज सकते हैं


    Maa par kavita: मां (Maa)

    हर शै से ऊपर जग मे माँ होती है,
    एक अक्षर मे छुपी पूरी दुनिया होती है।
    जितने लाडों से पालती है माँ बच्चो को,
    बच्चों की नजर मे उतनी कद्र कहाँ होती है।।

    हर दुःख को अपने आँचल मे छुपाती,
    खुद भूखी रहकर भी बच्चों को खिलाती।
    गुणों के भंडारों से तर बतर होती है हर माँ
    कभी ना अपने बच्चों को कुछ बुरा सिखाती।।

    धरती पर माँ ही भगवान की पहचान होती है,
    उसके बच्चों मे छुपी उसकी जान होती है।
    कुछ देर जरुर बैठा करो अपनी माँ के पास,
    माँ सिर्फ माँ नहीं माँ तो तजुर्बो की खान होती है।।

    हर आफत हर परेशानी खुद दूर होती है,
    माँ ही जमीं पर जन्नत से बहता नूर होती है।
    गलती से भी कभी कोई गलती न करती वो,
    वो तो बस कभी कभी बच्चों की जिद के आगे मजबूर होती है।।

    सिर्फ एक माँ है जो कभी न नाराज होती है,
    मूक बच्चे की माँ ही हमेशा आवाज होती है।
    कोई भी सम्मान बड़ा नहीं होता माँ की सेवा के आगे
    अरे लोगों सुखी माँ ही धरती पर सबसे बड़ा ताज होती है।।

    लोगों चाहे मत संभालो अपनी जां को,
    पर सम्भालों जरुर अपनी प्यारी माँ को।
    हर काम मे खुद ब खुद हो जायेगी बरकत,
    कभी हल्के मे मत लेना उसकी दुआ को।।

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa par Kavita: माँ शारदे

    तू ही है भाग्य की देवी माँ
    हर साँस तू संवार दे
    तेरे ही हाथों है,मोक्ष की डोरी
    भवसागर से पार उतार दे
    माँ शारदे माँ शारदे
    माँ शारदे माँ शारदे
    हर एक आँगन में,तू नूर बिखेर दे
    हर अँधेरी रात को,तू हसीन सवेर दे
    पतझड़ परेशानी से हो जाए पागलI
    जमीन के चप्पे चप्पे को तू,इतनी बहार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    हर दुर्घटना से,सबको बचा तू
    सुन्दर राहों से सबका जीवन सजा तू
    कोई किसी से चाहकर भी ना जले
    देकर सदमति,सबका जीवन निखार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    तू ही भाग्यविधाता,तू ही स्वर निर्माता
    तू ही वाणी है, तेरे ही रहमो-करम पर माँ,
    आश्रित हर एक प्राणी है
    भटकी हुई हर रूह को माता
    तू जिंदगी का असल सार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    कुछ ऐसा कर दे,सरहदों पर अमन की पवन बहे
    जाति धर्म चाहे कुछ हो,सब एक दूजे को अपना भाई कहे
    चाहकर भी कोई ना हो किसी के खून का प्यासा
    हर जिस्म को तू सच्चे संस्कार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    सर्वनाश उसका तू कर दे माँ
    जिसने अमन के चमन में आग लगाई है
    भेज दे उसको भी नर्क तू माता
    जिसने जमीन पर दंगों की चाल बिछाई है
    देखकर जो खुश है दुःख किसी का
    उसको तू,विपत्तियों का अटूट अम्बार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    हर दिन हो त्यौहार हर घर में
    हर रात हो दिवाली सी उजाली
    रक्षक समझे हर बसर खुद को वतन का
    बन जाए हर साँस वतन उपवन का माली
    छुपा है जिस जिस के हृदय में गद्दारी का दानव
    बनकर महाशक्ति उस दानव को तू मार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    दे इतनी शक्ति, हर जिव्हा बोले देशप्रेम की भाषा
    कामयाबी मिले सबको,हो हर साँस की ये अभिलाषा
    सबके हृदय मासूम हसीन गुलाब से चहके
    किसी भी रूह को ना, तू अहंकार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    वो साँस अ माँ, कभी किसी बात से ना डरती
    जो जो भी दिन-रात, गुणगान तेरा है करती
    बनाया है जब सबको मानव रब ने
    तो हर मानव का,मानव सा तू व्यवहार कर दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    हर एक ख़ुशी उसके घर आँगन उतर आई है
    जिस जिस ने भी अ माँ तेरी महिमा गाई है
    निकाल कर ह्रदयों से गन्दगी बाहर
    हर सोच को तू सुन्दर आकार दे
    माँ शारदे माँ शारदे

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Mothers Day Poem: मां सबकुछ है

    गहन अंधेरों को उजालों में बदलती है
    औलाद के हर दुःख को पल में छलती है
    मजबूर हो जाते है देव भी उसकी ममता के आगे
    खुदा से ज्यादा धरती पर माँ की चलती है

    फैला रूह में हर वक्त उजाला होता है
    माँ का प्यार तो अमृत का प्याला होता है
    सोचते ही हर दुआ खुद पूरी हो जाती है
    माँ का रूप ही सबसे बड़ा शिवाला होता है

    माँ ही फरिश्ता माँ ही पैगम्बर होती है
    माँ दिखती है बाहर पर रूह के अंदर होती है
    कोई श्रृंगार बड़ा नही माँ की मुस्कान के आगे
    धरती पर माँ ही सबसे ज्यादा सुंदर होती है

    निरंतर जो बहती माँ तो वो अदभुत नदी है
    आजकल की बात छोड़ो माँ तो एक सदी है
    हर शै छोटी होती है माँ के आकार के आगे
    माँ सारे जहानो को मिलाकर भी बड़ी होती है

    माँ से ही औलाद की औकात होती है
    माँ ही धर्म माँ कर्म माँ ही जात होती है
    माँ के रहते चाहे मत ध्यान करों किसी देव का
    माँ के रूप में हर रोज देवों से मुलाकात होती है

    जो काट देती दर्दों को माँ वो दुआ होती है
    माँ अथाह सागर माँ प्रेम का कुआँ होती है
    चाहे कितनी मर्जी देती हो माँ औलाद को गालियाँ
    पर कभी ना माँ के लबों पर बददुआ होती है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Maa Pe kavita: मां जीवन की रुनझुन है


    लाख अभाव हो जीवन में, पर मां कभी इनकार नही करती
    लाख परेशान हो मां, पर कभी गैरों सा व्यवहार नही करती
    सोते जागते दिन रात, मां को तो सिर्फ दिखता औलाद का सुख
    मूर्ख है जो ये समझते, के मां उन्हें प्यार नही करती

    सांसे भी कई बार मां से सांसे उधार लेती है
    पतझड़ भी मां की मुस्कान से बहार लेती है
    मां ही एकमात्र फरिश्ता है, इस सम्पूर्ण सृष्टि में
    हर सांस मां की वजह से ही तो, धरती पर आकार लेती है

    लड़ी जो जाती, अपनों की सुरक्षा के लिये, मां वो जंग है
    किसी चीज की परवाह नही होती, होती जब मां संग है
    फीका है मां बिन जीवन का हर उत्सव हर त्यौहार
    देखते ही जिसको हसीन हो जाती उमंगे, मां वो रंग है

    अपनी गोदी में लिटाकर मां जन्न्त के सब नजारे दिखाती
    पिलाकर परिवार को अमृत, मां सारी कड़वाहट पी जाती
    मां के स्वरूप को समझो, मां है खुशियां खिंचने वाली चुम्बक
    होती है जिस घर में मां खुश, किस्मत बिन बुलाये वहां आ जाती

    मूर्ख नादान है वे सब, जिनको मां की प्रतिभा पर शक है
    अरे मां तो उपजाऊं जमीन, मां जीवनदायनी फलक है
    किसी बात से डरने की, घबराने की बिल्कुल जरूरत नही
    कोई कुछ नही बिगाड़ सकता, प्यारी माँ साथ जब तलक है

    जीवन के हर रूप में जो बहता, मां वो अदभुत खून है
    मां शास्त्रीय संगीत सी पावन, मां धड़कनों की धुन है
    मां से ही बना है, हर ज्ञान, हर कलाकार, हर तजुर्बा जीवन का
    मां नवरत्नों सी प्रतिभाशाली, मां जीवन की रुनझुन है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Mothers Day Poem: मां से मिलकर कायनात हंसती है

    चमकीला होता है हर दिन, हर एक रात हँसती है
    देखकर माँ को खुश, सारी कायनात हँसती है ||

    बातों बातों में भुला देती, माँ हर एक गम को
    देखकर माँ की कारीगिरी, हर बात हँसती है ||

    माँ से बड़ा कोई धर्म ना हुआ है, ना होगा कभी
    माँ के सामिप्य को पाकर, हर जात हँसती है ||

    माँ ही जगत जननी,माँ ही अदभुत जीवन है
    आकर माँ की कोख में, जिंदगी की शुरुआत हंसती है ||

    माँ के चमत्कारी स्पर्श से,हर जख्म खुद भर जाता
    माँ के अदभुत आशीर्वाद पाकर,हर गात हंसती है ||

    माँ के इशारे पर,फरिश्ते भेजते हर खुशी आँगन में
    आकर माँ की पनाहों में,रहमतों की बरसात हंसती है ||

    माँ के आशीष दिखाते,औलाद को राहें कामयाबी की
    माँ की आज्ञा पाकर,दुआओं की बारात हंसती है ||

    माँ की मौजूदगी से महका रहता सदा जीवन का गुलशन
    माँ की हरी भरी बातें सुनकर,हर जज्बात हंसती है ||

    माँ हरा देती हर गम को, अपनी अनोखी क्षमता से
    हार कर खुशी खुशी माँ से, फिर मात हंसती है ||

    जब जब भी मिला है माँ से 'नीरज'कुछ लेकर लौटा है
    माँ से किसी बहाने से मिलकर, मुलाकात हंसती है ||

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Poem on Mother: कायनात अ माँ तेरे कदमों तले

    सारी कायनात अ माँ तेरे कदमों तले झुकती है
    छींक भी तुझे आ जाती, तो कुछ देर के लिये जिंदगी रूकती है
    तुझ जैसा सांसो का रखवाला कोई हो ही नही सकता
    क्योंकि औलाद को संभाले, कभी ना तेरी बाहें थकती है

    माँ ही शीतल चन्दन, माँ ही नर्म मलमल है
    प्यारी माँ में सौ हाथियों से ज्यादा बल है
    माँ की दी हर एक सीख, जिंदगी को सरल बनाती
    क्योंकि माँ की कही हर बात, फरिश्तों सी अटल है

    माँ ही अदभुत जमीन, माँ ही दयालु फलक है
    जो दिखाती सदा सुख के नजारे, माँ वो पलक है
    डरने की जरूरत नही जीवन में किसी डर से
    हर साँस है महफूज, माँ करीब जब तलक है

    तेरे होने से ही सुगन्धित घर का कोना-कोना है
    तेरा ना होना जिंदगी में, किसी तजुर्बे की खान का खोना है
    तेरी सेवा ही समझो, घर आँगन में मोती बोना है
    तेरे आँचल की छावं में सोना ही, जन्न्त में सोना है

    जो लुटाता हर बार रहमतें माँ वो भगवान है
    माँ से ही होती धरा पर ममता की पहचान है
    हर शब्द कम है तेरी तारीफ को, अ शब्द माँ
    जो बचाता धरा पर जीवन को, माँ तो वो वरदान है

    दुःखो से सुलगती रूह को माँ, लेप राहत का लगाती
    औलाद की छोटी से छोटी चोट पर माँ, हजारों मोती बहाती
    माँ की दुआ ले आती देवों को जमीन पर खींचकर
    औलाद को सुखी देखने के लिये माँ हर दुःख को हंसते हंसते सह जाती

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Poem on Mother: MERI MAA ( मेरी माँ )

    अथाह श्रृंखला है तू जज्बातों की
    पालनहारी है तू गहन रातों की
    कुछ न चाहती कभी औलाद से
    सिर्फ भूखी है तू मीठी बातों की

    किसी फरिश्ते सा होता सदा तेरा व्यवहार
    तुझ जैसा कोई कर नही सकता प्यार
    अपसराएँ भी चाहे खुद उतर आयें जमीन पर
    पर माँ की मुस्कान के आगे फीका है हर श्रृंगार

    तू गर्म धूप में ठंडी हवा का झोंका
    तू हर बार माफ कर देती है मौका
    होता है हर कोई बेदर्द जमाने में मतलबी
    माँ कभी नही करती औलाद संग धोखा

    तुझसे बड़ा नही कुल मिलाकर भी सारा जहान
    तू है बड़े से बड़े देवता से भी ज्यादा महान
    छू लिया जिसने दिल से तेरे चरणों को
    छू लिया समझो उसने हर एक आसमान

    तू है जीवन को रोशन करने वाली अदभुत बाती
    नूर से भरी होती है माँ तेरी करिश्माई छाती
    सकुन मिल जाता है बैचेन रूह को तेरे आंचल तले आ कर
    बैचेन जिस्म, रोती रूह को वहां पल में नींद आ जाती

    पारस हो गया वही जिसको तूने छुआ
    तेरे होते कुछ ना बिगड़ पाती कोई भी बददुआ
    मना कर ना पाते फरिश्ते भी तेरी अरदास को
    अपने बालक के लिये कामयाबी छिन लाती है तेरी दुआ

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    इन कविताओं में माँ के हर बलिदान को बताया गया है दोस्तों  अपने ऐसी माँ पर कविताएँ पहले कभी नहीं पढ़ी होगी, इसलिए यह कविताएँ जरूर पढ़ें और हमे Maa par Kavita in Hindi 2020 पर अपने विचार जरूर बताएं…….

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