5+ Best Hindi Poems on Friendship | हिन्दी कविताएँ दोस्ती पर

Poems on Friendship: इस blog में आप पढेंगे Hindi Friendship Poems पर बहुत सारी हिंदी कविताएँ | दोस्ती (friendship) एक अनमोल रिश्ता है, हम सब को इसकी कदर करनी चाहिए | इसी बात को ध्यान में रखते हुए Neeraj bansal की रचनाएँ (Friendship Poems) दोस्ती पर हिंदी में ......
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कुछ लम्हे खूबसूरत, अमर चित्र हो जाते है
कुछ संवाद खूबसूरत, महकते इत्र हो जाते है
जमीन पर रह कर कई बार रब याद नही आता
ये तब होता है, जब कुछ अच्छे लोग मित्र हो जाते है
Dosti mein duriyan aati rahti hai,
phir bhi dosti dilo ko milati rahti hai,
woh dost ki kya jo naraz na ho,
par sachi dosti dosto ko milati rahti hai.....
Dost to ruksat ho hi jate hai..!
par kuch yaadon ke dayre ban jate hai..!
bhool jana to insaan ki fitrat hai..!
dekhte hai aap humain kab tak yaad rakh pate hai…

Friendship Poem in Hindi: मेरा प्यारा बचपन

हर रोज एक ही चीज को सड़कों पर ढूंढने निकल पड़ता है तन मन
अ बेदर्द शहर की गलियों,फिर से लौटा दो तुम,मेरा प्यारा बचपन

आज जिंदगी की जिम्मेदारी से झुलसा हुआ शरीर, बार बार ये सोचता है
कितनी ठण्डी होती थी वो,माँ की गोदी की अदभुत,सुहानी तपन

इस ख़ौफ से दर्द ही नही होता आजकल बदहवास जिस्म को
दादी तो अब रही नही,कौन अब सलीके से सहलायेगा टूटा हुआ बदन

धुप की किरणों के,जहरीले तीरों की परवाह ही नही होती थी तब
माँ की उंगलिया बालों को सहलाते हुए,लगा देती थी रूह को चन्दन

थोडा सा डर लगते ही घर की,माँ बाप की,दादा दादी की याद आती थी
आज इतने निडर हो चले है,सोचते है के घर के बुजुर्गो को कब मिलेगा कफ़न

आज जब खुद की औलाद बोलती नही सलीके से,समझ आता है
कितनी बार हमने,माँ बाप की खुशियों को अपने हाथों से लगाई है अगन

बिन बात,बेवजह की बातों पर घण्टों घण्टों हंसते रहते थे नादानी से
अब खुलकर हंसे,मालूम नही बीत चुके हैं कितने ही दिलकश सावन

खुद के बीवी बच्चों को छोड़कर कोई और जमाने में अपना ही नही बचा
तरस गयी है निगाहें देखने को,फिर से वही परिवारों का सौम्य मिलन

कम्प्यूटर,मोबाईल, टीवी,इंटरनेट ने सब बेडा गर्क कर दिया
खुद को तन्हा पाकर रोते रहते है सूनी गलियाँ और आँगन

मस्त रहते थे हरदम,अपनी ही एक शानदार ख्याली दुनिया में
आज याद करके उन्ही शरारती लम्हों को, रो पड़ता है जिस्म का कण कण

आज हर रिश्ता नाता,हर यारी दोस्ती,हर सम्बन्ध है सिर्फ मतलब का
अब खिलते नही वो अपनों पर मर मिटने वाले दोस्ती के अदभुत चमन

आज समझ आया के माँ बाप ही सच्चे हमदर्द,होते है औलाद के
जीवन में वो कभी भी मानव नही बन सकता,जो करता नही इन्हें दिल से नमन

रूह को हर वक़्त प्यास लगी रहती है,एक नये जालिम अरमान की
बेदर्द कदम इच्छापूर्ति की चाह में रौंद देते हैं, जीवनरक्षक सरजमीं-ए-वतन

हावी है बीते हुए दिनों के हसीन लम्हें,दिल के उबड़-खाबड़ धरातल पर
रोने को हो जाती है परेशान रूह, जब भी जिंदगी आदमी को दिखाती है दर्पण

थक गयी है रूह देखकर जालिम जमाने के नये मतलबी रीति रिवाजों को
या तो उठा ले मुझ 'नीरज'को दाता, या फिर से लौटा दे मेरा खोया हुआ बचपन

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

Friendship Poems Hindi: ऐ जिन्दगी मुझको मेरा बचपन लौटा दे

माँ बिना जब लम्बी आहें भरता था
पिता की आँखों से मैं जब बहुत डरता था
सिर्फ बातें बड़ी बड़ी मैं जब करता था
यूं तिल तिल जब रोज ना मै मरता था
मुझको मेरा वही निर्दोष मन लौटा दे
ऐ जिन्दगी मुझको मेरा बचपन लौटा दे

जब मुझको तितलियां हंसाती थी
बालों में माँ की उँगलियों से नींद आ जाती थी
सुखी रोटी भी तब मुझको भा जाती थी
यूँ ना तकदीर मुझको भीतर से खाती थी
मेरा खोया हुआ वो अदभुत चमन लौटा दे
ऐ जिन्दगी मुझको मेरा बचपन लौटा दे

अब दिन रात किसी हवस में रहता हूँ
धन दौलत के बने गंदे कफस(पिंजरे) में रहता हूँ
नचाती है जिन्दगी मुझको अपने तरीके से
अपनी वहशी हसरतों के बस में रहता हूं
फिर से पिता के अदभुत स्नेह की तपन लौटा दे
ऐ जिन्दगी मुझको मेरा बचपन लौटा दे

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

friendship poems in hindi: वो दोस्ती नही

बस पल दो पल का देकर साथ
छोड़ जाते जो बीच राह में हाथ
चुनकर राहों से कलियां
जो शूल हैं बोते
वो दोस्त नही होते

जिनकी फितरत में है धोखा
ढूंढते रहते जो हर वक्त मौका
सिर्फ साथी होने का
जो थूक है बिलौते
वो दोस्त नही होते

सिर्फ सुख में साथ निभाते
मुसीबत के वक्त छोड़ जाते
आगे से दिखते जो शाह
पीठ पीछे चाकू गोते
वो दोस्त नही होते

नही समझते जो यार का दर्द
बने रहते सदा नकली हमदर्द
चोट लगने पर दोस्त को
जो अपनी पलकें नही भिगोते
वो दोस्त नही होते

यार को जब हो कोई जरूरत
मोम से बन जाते पत्थर की मूरत
तरह तरह के करते नखरे
जगाने पर भी जो रहतें है सोते
वो दोस्त नही होते

इतने आसान नही होते रिश्ते निभाने
तैयार रहना पड़ता है खुद को मिटाने
खुद तो मांग लेतें है जान दोस्त की
देने का वक्त आते ही
जो दहाडे मार कर रोते
वो दोस्त नही होते

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


Hindi poems about friendship: Aa Lag Ja Gale

आकर नजदीक लगवा ले तू रंग मुझसे
अ दोस्तभीख मांगता हूँ तुझसे फैलाकर झोली
पहले जो हो चूका सो हो चूका,भूल जा
आज फिर से लग जा गले,आज है होली

दूर रहकर तुझसे कुछ ना पाया मैंने
बहुत पछता लिया,बहुत ये आँखे रो ली
आज फिर से सारे अरमान जाग गये पुराने
आज फिर से लग जा गले,आज है होली

छोटी सी किसी बात को लेकर
दो दिलों के दरमियां काँटों की फसल थी जो बो ली
हटाकर आज हर रुकावट को आजा
आज फिर से लग जा गले,आज है होली

शुक्र है इस रंगो के त्यौहार का
जिसने आज मेरी आँखे है खोली
फिर से कभी गलती ना होगी दोबारा
आज फिर से लग जा गले,आज है होली

समझ में आज मुझे है आया
कड़वी बातें तो होती है गोली
कसम से अब सारी उम्र जुबान पर रहेगा सलीका
आज फिर से लग जा गले,आज है होली

मिल गयी जन्नत जमीन पर मुझको
जूं ही तूने मेरी बाहें अपनी बाँहों में ली
सचमुच अपनों से बढ़कर कुछ नही होता जहान में
यही समझने की खातिर ही शायद हर साल आती है होली

बिन तेरे बहुत ये आँखे रो ली
आज भर दे मेरी तू रंगों से झोली
मना ना करना अ मेरे साथी
आज है मिलन का दिन आज है होली

तुझसे मिले हो चूका है अरसा
कैसे बताऊं बिन तेरे कितना हूँ तरसा
पछता रहा हूँ आज बहुत
क्यूं मैंने फसल काँटों की बो ली
आज है मिलन का दिन आज है होली

चैन मिला नही बिन तेरे एक पल भी साथी
क्यूं दिमाग से गरूर की बातें नही जाती
याद आ गये वो सब दिन पुराने
जब बनाकर घुमा करते थे टोली
आज है मिलन का दिन आज है होली

कुछ ना पाया कभी तुझसे बिछड़कर
कोई और ना था दुनिया में तुझसे बढ़कर
पल पल गुजरा है तुझ बिन अंधेरों में मेरा
देखकर तुझको आज मेरी हसरतें फिर से डोली
आज है मिलन का दिन आज है होली

जानता हूँ हर रोज तूने भी मुझे याद किया
कभी ना मेरी यादों से खुद को आजाद किया
दिल में है कसक तेरे भी मेरी खातिर
बना मत तू यूँ अपनी सूरत को भोली
आज है मिलन का दिन आज है होली

बिछड़कर तुझसे तेरी कद्र को समझा
एक तू ही तो था जिसने मेरी नजर को समझा
जाग जा आज गहन नींद से अ दोस्त
बहुत ये गंदी,अंधी हसरतें सो ली
आज है मिलन का दिन आज है होली

कभी ना तुझसे बिछड़ने का मेरा इरादा रहा
भूल होगी ना कभी दोबारा,तुझसे ये वादा रहा
या तो अपना ले आज फिर से मुझको
या फिर मार दे मेरी छाती पर गोली
आज है मिलन का दिन आज है होली

आज सबसे बढ़िया होगा त्यौहार हमारा
आज मान गया रूठा हुआ यार हमारा
मिल गयी हमें तो जमीन पर ही जन्नत
जो ही तूने मेरी बाहें, अपनी बाँहों में ली
आज है मिलन का दिन आज है होली

दिल उपवन का तो आज हर गुल खिला है
आज फिर से मेरा अभिमान मुझको मिला है
किस्मत से मिल गये हैं अ दोस्त दोबारा
ऐसी कभी ना करना अ रब फिर से ठिठोली
आज है मिलन का दिन आज है होली

कितना पावन ये होली का रंग है
मेरी सारी दुनिया आज मेरे संग है
मत गौर कर इन निगाहों पर साथी
बस यूँही ख़ुशी में ये आँखे भिगो ली
आज है मिलन का दिन आज है होली

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

Best Hindi Poems on Friendship: Dosti | दोस्ती

जो दे दे धोखा यारी में, वो यार नही होता
दोस्ती में दोस्त जान भी मांग ले तो इंकार नही होता ||

मिलते ही नजरे किसी से, कहने लगे उसे अपना खुदा
पहली नजर का प्यार लोगों कभी प्यार नही होता ||

अपनी ही किसी खासियत से कोई, रूला देता है जमाने को
वरना किसी के मरने पर, भावुक ये संसार नही होता ||

कभी ना कभी कामयाबी जरूर देता है
किया हुआ प्रयास कभी बेकार नही होता ||

हर काम के लिये यहां एक कोशिश तय है
सफलता के लिये सिर्फ किस्मत का इंतजार नही होता ||

देनी है तो दो जाकर किसी के मुंह पर गाली
पीछे किया वार कोई वार नही होता ||

ये तो खुदा ने बनाकर भेजा है किसी ना किसी को हमसफर
युं ही किसी की खातिर ये दिल बेकरार नही होता ||

हम तो कर चुके है इजहारे महोब्बत, अब तू भी इकरार कर ले
उल्फत के खेल में कभी नकद उधार नही होता ||

जो कर देती है रोम रोम को रोमांचित, वही कहलाती है फिजा
चंद आवारा बुंदो का नाम कभी बहार नही होता ||

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

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