Parents Poems Hindi | माता पिता हिंदी कविता 2020

PARENTS POEMS HINDI | माता पिता पर दिल को छू लेनी वाली हिंदी कविता 


Poem On Parents:घर के बुजुर्ग

* बच्चों की नफरत सही जा सकती है
बच्चों का दुःख नही



Poem On Parents:  जिन्दगी का अहसास

माँ बाप मिलकर जिन्दगी को जिन्दगी होने का अहसास दिलाते है
खुद रोते रहते है दोनों, पर अपनी औलाद को हर हाल में हंसाते है
कभी ना करों दोस्तों माँ बाप की सच्ची चाहतों पर शक
अरे माँ बाप का तो होता है औलाद के जिस्म, उसकी रूह पर हक

माँ बाप हर हसीन जन्नत से भी बहुत ज्यादा खास होते है
जो बसता है फरिश्तों की रूह में भी माँ बाप वो अहसास होते है
शाख शाख दोनों के जिस्म की रहती है सदा फिक्र से लदी
पिता प्रेम का होता है सागर, तो माँ है ममता से भरी हुई नदी

माँ बाप ही मिलकर बुनते है, अपनी औलाद के सपनों का घोंसला
बाप बन जाता है अगर साहस, तो माँ है रूह में बसा हुआ हौसला
कोई भी नही समझ सकता माँ बाप के अथाह प्रेम की गहराई
दिखती तो अपनी है, पर जो साथ चलती, वो तो होती है माँ बाप की परछाई

समझो इसे,माता पिता तो सृष्टी के सबसे बड़े कलाकार होते है
हर देवता से भी खुबसुरत उनके व्यवहार होते है
अच्छे गुणों, सच्ची शिक्षा अनमोल प्यार से भरे समुन्द्र होते है
माँ बाप दुनिया की हर खूबसूरती से ज्यादा सुंदर होते हो

माँ बाप से बेहतर नही होती दुनिया की कोई भी सुविधा
खुदा को जमीन पर बुला लाती है माँ बाप की हर एक दुआ
बता अ नीरज कब माँ बाप कहीं पर अपनी परेशानी लिखते है
माँ बाप तो मिलकर जमीन पर हर एक साँस की कहानी लिखते है

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


Poem On Parents: सारी दुनिया दीवानी दादी तेरे दर की

दादी करना तू ही रखवाली अब तो मेरे घर की
मैं तो जोगन बन चुकी हूं,दादी तेरे दर की
आया हाथ सर पर,नही बात कोई अब डर की
सारी दुनिया दीवानी हो चुकी है,दादी तेरे दर की

हर जिस्म हर रूह को,मुसीबत में भी पाला है
तूफानों के वक्त दादी ने,आसमानों से ऊंचा उछाला है
मांगता है जब भी कोई,खाली हाथ नही आता
दादी के दरबार में कभी नही होता ताला है

काट दे दादी के आशीर्वादों को
ये हिम्मत नही किसी देवता,किसी बशर(व्यक्ति) की
मैं तो जोगन बन चुकी हूं,दादी तेरे दर की
बंजर उजाड़ खेतों में,तू नीर बहाती है
भक्तों का हर दुख,तू खुद ही उठाती है

अंधेरों में जब नजर आती नही रोशनी
तू बनकर पथप्रदर्शक,उजली राहें दिखाती है
पूजता है जो भी तुझको हृदय से दादी
तू बदल देती लकीरें उसके कर की
मैं तो जोगन बन चुकी हूं,दादी तेरे दर की

आ जाये वो शरण दादी की,जो हर जगह से हारा है
पाकर आशीष दादी का,चमकता किस्मत का सितारा है
भूल जाता इंसान अपने हर दुख दर्द हर परेशानी को
जन्न्त से भी अदभुत, दादी के दरबार का नजारा है
दादी सबसे महान है जग में
आज बता दूं मैं ये बात सबको अंदर की
मैं तो जोगन बन चुकी हूं,दादी तेरे दर की

खुशहाली का देव रोज उसके घर आता है
जो जो भी भक्त महिमा दादी की गाता है
किसी बात का उसे भय नही सताता है
जो जो भी दादी का अदभुत पाठ बिठाता है
सुनना चाहते है कान गुणगान दादी का
मत हमसे आप बातें करो इधर उधर की
मैं तो जोगन बन चुकी हूं,दादी तेरे दर की

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


SHORT POEMS ABOUT LIFE HINDI: घर में भगवान

देखकर मंदिर में भगवान की मूरत
सुकून मिल गया बेचैन मन को
घर में पड़े लाचार बेबस बूढ़े माँ बाप
ये मर क्यूं नही जाते

भूल जाते है लोग अहसान किसी के
बेरहम दुनिया जाने क्यूं गलत बातें सिखाती है
बिना बोले ही समझ जाती थी माँ तो सारी बातें
आज जवान होकर वही कहता है के माँ तू कुछ समझती ही नही

पड़े रहते है रात रात भर बाँहों में बाहें डाले
खांसते बाप की आवाजें जान बुझ कर सुनते नही
खुद की औलाद गलती से गिर जाये अगर
तो बेटा तुझे कहीं चोट तो नही लगी

बिना दांतों का इंसान मांग रहा है कई दिनों से भीख की तरह दांत
बीबी की क्रीम पाउडर की ख्वाइश पहली बार में पूरी हो जाती है
बगैर जरूरत के भी चीजें आ रही है घर में
घर का असली मालिक कुत्तों सी जिन्दगी जीने को मजबूर है

कोई चीज मांगने पर आँखे दिखाता है लाडला
शायर सालों सींच कर इसीलिये ये आँखे बड़ी की थी
अरे लोगों जिस रस्ते से जा रहे हो शहर से बाहर
याद रखना वही रस्ता घर को उल्टा भी आता है

माँ बाप का खाना पीना सिमित कर दिया बीबी के कहने पर
अपने सालों की खातिर मिठाई की दुकान खरीदी जा रही है
गलतफहमी में ना जाने क्यूं जी रहे हैं अधिकतर लोग
शौचालय को मन्दिर समझ बैठे है सारे,धत्त

नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

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