New Patriotic Poems | Desh Bhakti Poems | देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविताएँ

देशभक्ति पर कविताएं जो कि वतन पर मर मिटने वाले धरती मां के वीर सपूतों की अद्भुत शौर्य और पराक्रम का बखान करेंगी और आज की युवा पीढ़ी को वीर शहीदों के त्याग बलिदान और कुर्बानियों के महत्व का एहसास करवाएगी । यह देशभक्ति पर कविताएं देशप्रेम की भावनाओं को जागृत करेंगी।

New Patriotic Poems | Desh Bhakti Poems | देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविताएँ

Patriotic poems, Desh Bhakti poems
आज हम सब देश के स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों के त्याग बलिदान और कुर्बानियों की वजह से ही एक आज़ाद देश के वासी है भारत में सुख-चैन की सांस ले रहे हैं। देश के वीर सपूतों ने भारत को आजादी दिलवालने के लिए अपनी प्राणो का बलिदान दिया तब जाकर भारत देश आज़ाद भारत कहलाया।

महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरू जैसे तमाम स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की बदौलत ही हम सभी हिन्दुस्तानी आज गर्व के साथ अच्छी जिंदगी जी रहे हैं।वहीं देशभक्ति पर लिखी गईं, इस तरह की कविताएं उन वीर सपूतों की याद दिलाती हैं और उनके प्रति सम्मान की भावना पैदा करती हैं। वहीं आप इन कविताओं को ट्वीटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि पर भी शेयर कर सकते हैं। यह कविताएं आप स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस एवं अन्य कोई राष्ट्रीय पर्व पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भी इस्तेमाल कर सकते हैं–


    Desh Bhakti Slogans in Hindi

    *जिसमें देशभक्ति का नूर है
    वही जिस्म कोहिनूर है

    *नही मिलती जगह उसे दोजख में भी कहीं
    बदबू आती है उसमें से सदा हसीन बहारों को
    वो मिट्टी भी, मिट्टी कहलवाना पसंद नही करती
    दफनाया जाता है, जलाया जाता है जिसमे वतन के गद्दारों को

    *देशभक्ति की आंधिया उड़ा देती है बड़े से बड़ी इमारत को
    चाहकर भी कोई दुश्मन थाम नही सकता अपने घर की मिनारों को

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Desh Bhakti Kavita in Hindi: सबसे महान

    वो रूह, वो धड़कन वो सांसे सबसे महान है
    फहरता तिरंगा जिसमें, जिसमें बसता हिंदुस्तान है
    वो हाथ,वो पांव, वो आँखे सबसे बलवान है
    पूजते जो मातृभूमि को, जो जपते नाम हिंदुस्तान है

    हमें सजानी है अपनी मातृभूमि,हम इसकी संतान है
    ये हिमालय, ये गंगा, ये सारी धरती, हम सबका अभिमान है
    कोई नही हमसे ज्यादा वैभवशाली,ये ही फरिश्तों का अनुमान है
    मिल गई उसे जमीन पर जन्नत, जिस रूह ने गाया गौरव गान है

    रहकर इस पर जो नही समझते इसका वैभव,
    वो तो हैं महामूर्ख, बच्चे नादान है
    वो रूह, वो धड़कन वो सांसे सबसे महान है
    फहरता तिरंगा जिसमें, जिसमें बसता हिंदुस्तान है

    हर एक कण सबसे पावन, इस धरती पर सिर्फ हमारा है
    सबका साथ,सबका विकास, ये तो सिर्फ भारत का नारा है
    कभी नही देखा हमने किसी को,गलत वहशी ललचाई नजरों से,
    मुसीबत के वक़्त हम तो बने,जरूरतमंदों की सांसो का सहारा हैं

    ध्यान से निहारों प्यारों अपनी मातृभूमि को
    हकीकत में तो ये स्वर्ग से ज्यादा आलिशान है
    वो रूह, वो धड़कन वो सांसे सबसे महान है
    फहरता तिरंगा जिसमें, जिसमें बसता हिंदुस्तान है

    जन्नत के कोटि कोटि कंठ, हमारे वैभव की गाथा गाते हैं
    हर जाति, हर सम्प्रदाय, हर वेशभूषा को
    हम भारतवासी ख़ुशी ख़ुशी अपनाते है
    सदियों से ये अदभुत भूमि, सिर्फ अपने गौरव पर जिन्दा है
    कोई मांगे तो अपना भी छोड़ देते, दूसरे का तो हम कभी नही खाते हैं

    समझो अपने भीतर छुपे दिव्य व्यक्तित्व को
    आज भी हम विश्व में सबसे ज्यादा विद्वान है
    वो रूह,वो धड़कन वो सांसे सबसे महान है
    फहरता तिरंगा जिसमें, जिसमें बसता हिंदुस्तान है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Desh Bhakti Kavita in Hindi: सरहद बुलाती है

    मैया रोती, बापू रोता, रोता घर का हर कोना है
    जा रहा सरहद पर,उनके हाथों का अनमोल खिलौना है
    कैसे ना भेजूं सरहद पर,कहती मैया प्यारी है
    मातृभूमि मेरे वतन की, हर माँ से ज्यादा प्यारी है

    जाना होगा तुझे सरहद पर,बुलावा वतन का आया है
    मौका है कुछ अहसान चुकाने का,जो नमक देश का खाया है
    बढ़ाने को शान वतन की देश की मिट्टी तुम्हे पुकारती है
    भेज रही हूँ हर्षित मन से , माँ कहकर ख़ुशी ख़ुशी आरती उतारती है
    कहती सरहद पर जाकर अ लाडले,तू अपना फर्ज निभाना
    मंजूर होगा तेरा शव मुझको, पर खाली हाथ मत आना
    जाकर सरहद पर तुझको दुश्मन के घर घर में तिरंगा बोना है
    मैया रोती, बापू रोता, रोता घर का हर कोना है

    बापू कहता हर विपदा में तुम ,सरहद पर सजग लाडले खड़े रहना
    चले बंदूके, चलें तोपें, पर तुम सरहद पर लाडले अड़े रहना
    नही परवाह चाहे वतन की खातिर, देश की हवाओं में खो जाना
    नही हटना पीछे बेटा, चाहे वतन की मिट्टी में मिट्टी हो जाना
    लेकर हार को संग अपने, नही जन्नत भी तुझको जाना है
    चाहे देनी पड़ी जान हजारों, पर प्यारा तिरंगा फहराना है
    सुख मिलेगा रूह को तेरी, हर क्षण खुद को तुझे देशप्रेम चुभोना है
    मैया रोती, बापू रोता, रोता घर का हर कोना है

    बहना कहती मेरे भैया, तेरा जाना मुझको रुलाता है
    कुछ हो ना जाये मेरे भैया को, मुझको ये अनजाना डर सताता है
    पर वतन की खातिर मैं अपने सभी जज्बातों को थाम लूंगी
    गर आ ना पाया तू रक्षाबंधन पर तो तेरी तस्वीर को राखी बांध लूंगी
    तेरे जैसे वीरों से ही होते पूरे किसी वतन के सपने है
    धन्य है वो सब माएँ जिसने तुझसे सच्चे सपूत जने है
    एक एक इंच वतन की सरहद का टुकड़ा
    समझना माँ की गोदी का अदभुत बिछोना है
    मैया रोती, बापू रोता,रोता घर का हर कोना है

    पत्नी कहती:-मेरे साजन तुझको अलविदा, मैं तो ना कह पाऊँगी
    ये भी सच है तुझ बिन प्रियतम, मैं तो ना खुश कभी रह पाऊँगी
    नई उमंगे, नई जिंदगानी, नई बहारें, सबकुछ होकर, कुछ भी मेरे पास नही
    हूँ तो मैं कल-कल करती सरिता, पर खुलकर कभी मैं तो ना बह पाऊँगी
    पर वतन के आगे मुझको भी मेरे हमदम नतमस्तक होना पड़ेगा
    ना चाहते हुए भी मुझको मेरे बालम, रोज विरह की आग मैं रोना पड़ेगा
    पर मातृभूमि को शायद जरूरत है तेरी मुझसे ज्यादा
    देखा जायेगा, अपना तो जो होना है, सो होना है
    मैया रोती, बापू रोता, रोता घर का हर कोना है

    बेटा बोला माँ, बाबा, बहना किसी भी डर से ना मैं डरता हूँ
    अपने वतन की खुशियों की खातिर ही अब तो मैं जीता मरता हूँ
    मिट जाओ वतन की खातिर हर पल ये वतन की मिट्टी पुकारती
    मेरे जमीर को अ बाबा, मेरी सच्ची देशभक्ति चीख चीख पुकारती
    जाकर सरहद पर बहना, मैं अपने देश को महान बना दूंगा
    मिल गया गर मौका अ माँ, तो दुश्मन के घर घर में शमशान बना दूंगा
    छेड़ेगा जो मेरे वतन के सुख-चैन अमन को,उसको तो बस अब रोना है
    मैया रोती, बापू रोता,रोता घर का हर कोना है
    जा रहा सरहद पर, उनके हाथों का अनमोल खिलौना है
    कैसे ना भेजूं सरहद पर, कहती मैया प्यारी है
    मातृभूमि मेरे वतन की, हर माँ से ज्यादा प्यारी है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    Desh Bhakti Kavita in Hindi: सबसे समृद्ध भारत

    हर एक बात इसकी अनोखी विशेष है
    सबसे समृद्ध दुनिया में ये भारत देश है
    आधुनिक युग में भी हृदय हमारे दरवेश(फकीर) है
    सबसे समृद्ध दुनिया में ये भारत देश है

    कण कण मेरे राष्ट्र का रहस्यों से भरा है
    सबसे पावन विश्व में ये हिन्दू धरा है
    हर नारी सीता सी,हर पुरुष राम वेश है
    सबसे समृद्ध दुनिया में..................

    बांट रहा सदियों से ज्ञान,आज भी नही थका है
    ये भारत है अदभुत, ये तूफानों में भी नही रुका है
    सबसे प्रतिभाशाली देश से,जाने क्यों सबको द्वेष है
    सबसे समृद्ध दुनिया में..................

    हर संस्कार सारे विश्व का आधुनिकता की आग में जल गया
    मतलब पूरे होते ही बेटा ही माँ बाप से बदल गया
    पर संयुक्त संगठित परिवारों का,भारत में आज भी परिवेश है
    सबसे समृद्ध दुनिया में..................

    हिन्दू धर्म की हर विशेषता विदेशों ने मानी है
    सबसे ज्यादा शाकाहारी भारत के प्राणी है
    जीव ना करे जीव की हत्या यही हमारा उद्देश्य है
    सबसे समृद्ध दुनिया में..................

    हमारे यहां स्वामी विवेकानन्द जैसे हजारों महापुरुष हुए हैं
    जो दे रहे सदियों से नीर हमारे यहां,ऐसे भी की कुएं हैं
    बता दिया आपको सबकुछ, अब कुछ भी तो नही शेष है
    हर एक बात इसकी अनोखी विशेष है
    सबसे समृद्ध दुनिया में ये भारत देश है.....................
    आधुनिक युग में भी हृदय हमारे दरवेश(फकीर) है
    सबसे समृद्ध दुनिया में ये भारत देश है........................

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    Desh Bhakti Kavita in Hindi: तराने देश प्रेम के

    अपनी भारतभूमि को हम,जन्न्त सा सजाएंगे
    तराने देश प्रेम के हम तो रोज गाएंगे
    चप्पे चप्पे पर वतन के,हम रोशनी बिखराएँगे
    तराने देश प्रेम के हम तो रोज गाएंगे

    सजाना अपने वतन को,हमारी जिम्मेदारी है
    ये भारतभूमि भक्तों,जन्न्त से भी प्यारी है
    सम्पन्न है जीवन के हर रंग से ये अद्भुत धरा
    विश्व के हर देश ने ये सच्ची बात स्वीकारी है
    वतन के हर गम को,हम अपने कंधों पर उठाएंगे
    तराने देशप्रेम के हम तो रोज गाएंगे

    देश हो सबसे ऊपर, सबका ये प्रयत्न हो
    देशप्रेम से सजा,धरा का प्रत्येक कण हो
    हर जिस्म आलौकिक हो,राम सा सुन्दर
    कृष्ण भगवान सा हर एक का मन हो
    फिर होली,तीज,दीपावली हम तो रोज मनाएंगे
    तराने देशप्रेम के हम तो रोज गाएंगे

    बहुत जी लिये अपने लिये, अब हमें वतन पर मरना है
    भारत फिर से बन जाए विश्व गुरु,कुछ ऐसा हमे करना है
    मिटाकर वतन की खातिर जिस्मों-जान को अपने
    बनकर खुशबू अजब गजब,हमें वतन की मिट्टी में बिखरना है
    निश्चय करें हम,खुद से ज्यादा,अपने वतन को चाहेंगे
    तराने देशप्रेम के हम तो रोज गाएंगे

    हम सब भारतवासी मिलकर,इसका गौरव गान गाएंगे
    करके रक्तदान,नेत्रदान,देहदान हम इसको महान बनाएंगे
    सबकुछ देता है वतन प्यारा,ना इसको हम भुलाएँगे
    वतन होता है सबसे ऊपर,ये सबको समझाएंगे
    जय हिंद,जय मातृभूमि के नारों से
    हम अपनी सांसों को सजाएंगे
    तराने देशप्रेम के हम तो रोज गाएंगे

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    Desh Bhakti Kavita in Hindi: सबसे प्यारा अपना हिंदुस्तान

    देव बसते जिस भूमि पर,यही वो स्थान है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है
    धरती पर भारतभूमि ही,स्वर्ग की पहचान है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है

    आधुनिक इस युग में भी,हम कपट से दूर हैं
    हर रूह में बसता ताजमहल,हर दिल कोहिनूर है
    देखकर दर्द गैर का,हम पल में पसीज जाते
    हर साँस में मानव बस्ता,देवताओं सा हर रुख पर नूर है
    कोई भी धरा धरती की,ना इससे महान है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है

    होकर स्वार्थी हर मुल्क,हमसे बतलाता है
    पर विश्वास में जहर घोलना हमको तो नही आता है
    उठाया सबने हमारी शराफत का गलत फायदा
    हर पृष्ठ,हर घटनाक्रम इतिहास का यही बताता है
    हजारों बार लूटकर भी,हमारी राजाओं सी शान है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है

    हर नारी सीता कहलाती,हर नर में बसता राम है
    कहीं चर्चा होती रहीम की,कहीं दिलों में बैठा श्याम है
    कभी सिखाया नही तूने गैर का हड़पना
    अ मेरी प्यारी भारतमाता,तुझको प्रणाम है
    सीधे सच्चे लोग हमारे,सोचते मानव कल्याण है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है

    गली गली में मेरे वतन के,बहती प्रेम धारा है
    पर देख वतन पर विपदा,लोग बन जाते अंगारा है
    विश्वपटल पर मेरा भारत,सबसे चमकीला सितारा है
    चन्द सालों में होगा भारत सबसे आगे,कहता हर इशारा है
    जिस्म है अगर सारी दुनिया,तो भारतभूमि प्राण है
    सबसे प्यारा दुनिया में,अपना हिंदुस्तान है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    SHORT PATRIOTIC POEMS HINDI: हमनें खुद को पाया

    सुनकर सिसकी अपनों की, आँखें नम हो गई
    बेवफाई के मौसम में भी हमने
    तराना चाहतों का गाया है
    तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    करके मदद दूसरे की, अपनी तकलीफें भी कम हो गई
    अंधी हसरतों को कहीं दफन किया है
    खाकर चोट अपनों से बिन बात
    खुद को ही समझाया है, तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    तिरंगे को हमेशा अपना कफ़न किया है
    ख्यालों में भी बुलंदियों पर किया है, अपना वतन
    किसी का नुकसान करने का कभी किया नही प्रयत्न
    चाहे था जीवन अभावों में, पर हर पल देश का परचम लहराया है
    तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    हर दिन किया है, माँ-बाप, महापुरुषों को याद
    उनकी शिक्षा दौड़ रही रूह में बनकर खाद
    पिंघले नही कभी नाजायज दौलत पर
    ईमानदारी से अपना हर लम्हा बिताया है
    तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    अपनेपन देशभक्ति का ये देश भूखा है
    जितना दिखाया जाता, उतना नही सूखा है
    किया है बस हर बार काम ये हमनें
    पहले वतन का भरकर पेट बाद में खुद खाया है
    तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    जियेंगे मरेंगे वतन की खातिर ये प्रण लिया है
    हर सांस ने नाम हिंदुस्तान हर क्षण लिया है
    चाहे नही थे, हम खुद उठने लायक
    पर कभी ना हमने तिरंगे का मान गिराया है
    तब जाकर हमनें खुद को पाया है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'


    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: तिरंगा लेहराता है शान से

    देखकर रूह खुश हो जाती है अपनी तो ईमान से
    जब कही भी मेरा प्यारा तिरंगा लेहराता है शान से

    कभी पत्थर से दिल में जगह उनको भी दे दो अपने
    जो हमारी खातिर सरहद पर चले जाते है जान से

    तुम को कहां नजर आयेगी वतन की हालत मेरे भाई
    तुम देख रहे हो अपनी आँखों की जगह कान से

    संभाल लो अ दुनियावालों इस प्यारी धरा को तुम
    वरना टूट जायेगी एक दिन कोई आफत आसमान से

    हर अपना पराया मिलता है सिर्फ मतलब से
    सिर्फ स्वार्थ की उम्मीद रह गयी है अब तो हर इन्सान से

    कैसे मिटे जन्मों जन्म का पाप दुनिया में रहकर
    मैं बताता हूँ ये मिट सकता है बार बार रक्तदान से

    हसीन जन्नत को देखना है तो कभी मेरे वतन आओ
    कुदरत ने लिया है ये वर भारत के लिये भगवान से

    जहाँ भी जाता हूँ सफलता चूमने लगती है पैरों को मेरे
    हर चीज मिल जाती है मुझे मेरे माँ बाप के वरदान से

    लाख सशक्त हो कोई जहानों में,चाहे हो धनवान बहुत
    पर खरीद नही सकता सांसे दुनिया में किसी भी दुकान से

    कैसे यकीन कर लूँ दुनिया की झूठी चाहतों पर मैं 'नीरज'
    जब मेरे अपने ही मुझे निकलना चाहते है मेरे ही मकान से

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: जिद

    माँ मेरी मैं नही जाना स्कूल
    दे दे बंदूक तू मेरे हाथों में
    पचास सौ तो मैं उडा दूंगा
    बस यूँही बातों बातों में
    निकाल ले किताब मेरे बस्ते से
    उसमें भर दे तू हथगोले
    फिर देखूं कैसे झांके दुश्मन हमारी और गलत नजर से
    कोई कैसे हमसे गलत बोले

    पहुँच जाऊ दुश्मन के खेमें में मैं अकेला
    बस तू भर दे इतनी शक्ति मेरी लातों में
    खींच लाऊगा एक दो टेंक दुश्मन के
    मैं तो अपने छोटे-छोटे दांतों में

    कह देना जरा जवानों से
    ना वो समझे मुझको बच्चा
    मारकर दो चारों को
    मैं भर लूंगा उनसे अपना बस्ता

    नहीं भाग पाएगा कोई भी वापिस
    जब निकलेंगे मेरी बंदूक से शोले
    और सारे दुश्मनों के फट जाए कान मेरी माँ
    अगर सिर्फ एक बार भी सारा भारत मिलकर, दिल से इंकलाब बोले

    खुश हो जाऊंगा मारकर दुश्मन को
    उठा लूंगा साले को अपने हाथों में
    उठाकर उसको मैं ऐसे नाचूंगा
    जैसे नाचते है लोग बारातों में

    माँ मेरी मैं नहीं किसी इनाम का भूखा
    दे दो मुझको तो मेरा हरा-भरा देश सतरंगा
    मरते दम तक मेरी तो होगी यही कोशिश
    दुश्मन के घर-घर में लहराये मेरा प्यारा तिरंगा

    अगर ना आऊं घर वापस माँ
    तो मुझको तू मरा जान लेना
    ओर कह देना जरा जवानों से
    जहां मिले लाश मेरी, सरहद के पास उसी जगह से शुरू
    अब तो अपनी सरहद मान लेना

    मत ले लेना मेरे ज़ज्बातों को
    माँ मेरी, तू बच्चों की बातों में
    जब तक चला नहीं जाऊंगा सरहद पर
    मुझे नींद ना आएगी रातों में
    कैसे देखे दुश्मन हमारी और गंदी नजर से
    कैसे किसी का भी ईमान डोले
    जब यही बोलियां, भारत का
    हर बच्चा-बच्चा बोले
    ''भारत माता की जय ''।।

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: नन्ही परी


    बहन की राखी धरी रह गई
    हसरतें भीतर की भीतर मेरी रह गई
    सबको सदमा लगा जाबाज की मौत का
    पर सारे दुखों से अंजान एक नन्ही परी रह गई

    कर रही है बेसब्री से इंतजार अपने बाप का
    एक सूट तो जरूर लायेगा वो मेरे नाप का
    पर क्या मालूम है उस मासूम बेचारी को
    के लग चूका है डंक उसे तो एक सांप का

    निहारती रहती बेचारी दिनभर दरवाजे को
    सपनों में देखती बेचारी खिलौने वाले बाजे को
    जन्म देते ही बाप तो चला गया था सरहद पर
    भला कैसे पहचाने बेजुबान ताबूत में पड़े तिरंगे से नवाजे को

    समझ नही पा रही मासूम घर के बिगड़े माहौल को
    ना जाने क्या हो गया अचानक रोज के हंसी मखौल को
    हर तरफ नजर आ रही है केवल परेशान लोगों की भीड़
    देख रही है व्याकुल नजरों से टूट चुकी चूड़ी गोल को

    सिर्फ चीखों की आवाज आ रही है घर के सूने आँगन में
    क्यूं उसकी माँ रो रही है जोर जोर से सफेद दामन में
    कैसा जुल्म तूने किया है हे दयालु परमपिता परमात्मा
    आग लगा दी हरे भरे खेत में तूने सावन में

    उकसाई बैचेन नजरों से पिता की बात जोह रही है
    देखकर बार बार इधर उधर अपनी पलकें भिगो रही है
    शायद कल लौट आयेंगे मेरे पापा घर वापिस
    भरकर सपनों में सुनहरे सपने कल के, सब बातों से अंजान लाड़ली अब सो रही है

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: हिंदुस्तान अमर रहे

    कोई भी दर ना हो खुशियों से खाली
    घर घर बसरी रहे,जन्नत सी हरियाली
    मोती बरसे हर घर आँगन,सोने जड़ा हर दर रहे
    दुआ है बस यही, मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    खेत खलियान सारे ,उम्र भर हरे रहें
    रोम रोम हर जिस्म के,देशप्रेम से भरे रहें
    जिये मरें सब एक दूसरे खातिर,सुख चैन से बशर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    हर मुख पर फैली हो,देशभक्ति भरी मुस्कान
    खुशहाल,समृद्ध रहे वतन का हर एक किसान
    सिर्फ बरसे रहमतें हम पर,सर पर बुजुर्गो का अम्बर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    हर मुंडेर पर देश की अमन की चिड़िया चहचहाए
    हर बेटी मेरे देश की खुशियों के गीत गाए
    मानवता की लौ जगे हर दिल में,किसी को किसी का ना डर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    कोई भी ना सोए देश में भुखमरी लाचारी से
    किस्मत भीतर आने को तरसे हर एक चारदिवारी से
    भरे रहे भंडार सबके,किसी को ना कोई कसर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    खिलखिलाकर हर घर आँगन में माँ बाप हंसे
    हर एक मन में राम,हर एक ह्रदय में रहीम बसे
    दुःख किसके घर आया,सबको इसकी खबर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    ईमानदार हो जाएं हमारे सारे के सारे नेता
    ईमानदार वो भी हो सारे,जो भी हो वोट देता
    शान्ति होगी जब दिल में,फिर कहीं ना कोई गदर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    फैली हो पग पग पर,भाईचारे की चाहत
    चाहकर भी रब से हम कभी कर ना पाएं शिकायत
    अदभुत चरागों से सजी हुई,हर विरान डगर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    एक दूसरे पर हर एक जान हो सदा कुर्बान
    हर आदमी वतन का करे,रक्तदान नेत्रदान
    फलता फूलता सदा मेरे मुल्क का हर शजर रहे
    दुआ है बस यही,मेरा हिंदुस्तान अमर रहे

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: मातृभूमि

    मातृभूमि कर रही है सब से ये सवाल
    तुम ना रखोगे, तो बताओ कौन रखेगा ख्याल

    लाखों करोड़ों बार मेरा विश्वास टूटा है
    मेरे अपनों ने ही अकसर मुझको लूटा है
    घर में ही मेरे पैदा होते है लालची गद्दार
    समझ ना आया मुझे, क्यूं मेरा भाग्य फूटा है
    अपनों को पकड़ने के लिये यहाँ
    अपने ही बिछाते जाल
    मातृभूमि कर रही है सब से ये सवाल

    तुम ना रखोगे, तो बताओ कौन रखेगा ख्याल
    कुदरत की दी हर सौगात मेरी गोदी में पलती है
    पर कुछ गद्दारों को मेरी ये महानता खलती है
    कैसे ना सुनाऊं अपना दुखड़ा अपने जनों को
    अब सांस भी लेती हूं तो मेरी रूह जलती है
    बताओ भारतभूमि से ज्यादा
    कहां मिलेंगे एक साथ इतने सारे कमाल
    मातृभूमि कर रही है सब से ये सवाल
    तुम ना रखोगे, तो बताओ कौन रखेगा ख्याल

    बिन बात सरहद पर हमारे हजारों जवान मरते हैं
    अभाव में पैसों के हमारे हजारों किसान मरते है
    पढ़कर अंग्रेजी स्कूलों में, हम अपनाते जा रहे पाश्चात्य संस्कृति
    हिंदुत्व, सनातनी के इससे हर साल हजारों निशान मरते है
    अपनाकर सुविधाजनक जीवन हमने
    नरम बना ली है अपनी खाल
    मातृभूमि कर रही है सब से ये सवाल
    तुम ना रखोगे, तो बताओ कौन रखेगा ख्याल

    ये पावन धरा समझो, सारी दुनिया की जनक हो सकती है
    आज भी भारत भूमि पर हर जात चैन की नींद सो सकती है
    अगर ना संभाला हमने इस देव भूमि को मिलकर
    तो चन्द सौ सालों में ये भूमि अपना अस्तित्व खो सकती है
    इसको धरा से मिटाने के हजारों दुश्मन
    सपने रहें है पाल
    मातृभूमि कर रही है सब से ये सवाल
    तुम ना रखोगे, तो बताओ कौन रखेगा ख्याल

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    Short Desh Bhakti Kavita in Hindi: JAI ABHINANDAN (जय अभिनन्दन)

    PATRIOTIC POEMS, DESH BHAKTI KAVITA

    नासूर गहरे घाव पर लेप चंदन
    जय अभिनन्दन, जय अभिनन्दन
    तुझको भारत का शत शत वंदन
    जय अभिनन्दन जय अभिनन्दन

    घमंडी दुश्मन का तूने शीश झुकाया
    F 16 को तूने मिग 21 से मार गिराया
    दुश्मन को सीमा से बाहर भगाया
    प्यारी भारतभूमि का मान बढ़ाया

    किया वार दुश्मन पर तूने धांसू
    रो रहा दुश्मन अब खून के आंसू
    कली कली दुश्मन की रूह की जली
    भारत के वीर तूने मचाई खूब खलबली

    दुर्भाग्य से तू वीर, गलती से पकड़ा गया
    दुश्मन की जहरीली बेड़ियों में जकड़ा गया
    पर अपने ईमान से डिगा नही तू हे महान धीर
    बता दिया दुश्मन को, ये धरती जनती है महावीर

    बताया दुश्मन को वतन का कोई राज नही
    सही यातना, पर की दर्द की कोई आवाज नही
    ऐसा नही कोई विश्व की धरती पर
    जिसको तेरी वीरता पर नाज नही

    तेरा मूंछो का स्टाइल सबको भा गया
    तू अकेला ही दुश्मन की इज्जत को खा गया
    तोड़कर तू सारे बन्धन फिर से भारत आ गया
    बनकर सच्चा प्रहरी तू नीलगगन पर छा गया

    लिखें जाएंगे तुझ पर लाखों कलाम
    तेरी बहादुरी पर तुझको करोड़ों सलाम
    सदियों तक गाया जाएगा तेरा गुणगान
    बताया दुनिया को भारत क्यूं है महान

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

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