9+ Best Motivational Poem in Hindi | प्रेरक कवितायें

Best Motivational Poem In Hindi 2020: वर्तमान समय में प्रेरणा का अभाव है, सभी लोग एक दूसरे को गिराने में लगे हुए हैं कोई किसी की मदद नहीं करना चाहता है |

भागदौड़ भरी जिंदगी में बिना सोचे समझे लिए गए निर्णयो के कारण अक्सर युवा लोग निराश हो जाते है | फिर वे कुछ ऐसा काम कर बैठते है कि शब्दों में बयां करना मुश्किल हो जाता है |
motivational poem in hindi
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आज हर उस व्यक्ति का हाथ थामने की जरूरत है, जो निराशा से ग्रस्त है, इसीलिए हमने कविताओं के माध्यम से सभी को प्रेरणा देने का प्रयास किया है |

Neeraj Bansal ने Motivational Poem in hindi for Student लिखी है, हम आशा करते है, कि आपको यह सभी Motivational kavita पसंद आएंगी |


    Motivational Poem in Hindi-1: एक बार तो देखो सुलगकर

    एक बार तो देखो सुलगकर
    अजीब सकून मिलेगा मन को
    तकलीफ देकर तो देखो तन को
    तपकर शोलों की भट्ठी में
    हो गए शराब अंगुर गलकर
    एक बार तो देखो सुलगकर

    खुद को आसमानों से ऊंचा उठा लो
    आत्म तम को बाहर निकालो
    मिट्टी से भी आएगी खुशबू
    बनकर तो देखो हलधर
    एक बार तो देखो सुलगकर

    दासी नही होती मेहनत की तकदीर
    पर सब कुछ पा जाता है धीर
    चंद असफलताओं की ओर ध्यान मत दो
    देखो थोड़ी देर तो और चलकर
    एक बार तो देखो सुलगकर

    हृदय से त्यागो अपनी त्रुटियों को
    जिद से भींचो तो सही अपनी मुठ्ठियों को
    सफलता कदम चुमेगी तुम्हारे
    देखना है सिर्फ एक बार दिल से बदलकर
    एक बार तो देखो सुलगकर

    वक्त ही होता सबसे बडा गुरू
    करो इसके साथ कदमताल शुरू
    पत्थर भी बन जाता है भगवान
    किसी शिल्पी की हथौडी से ढलकर
    एक बार तो देखो सुलगकर

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

    # Motivational Poem in Hindi on Success-2: कल्पना

    अपने हिस्से की करो ईमानदारी
    चाहे कोई देखता हो या ना हो
    या छोड़ आओ मुझे ऐसी जगह पर
    मोहब्बत ही मोहब्बत बिखरी जहां हो

    चाहकर भी बदल ना पाए जहां इमान लोगों का
    चलती उस जगह पर ऐसी हवा हो
    दिखनी नही चाहिए कोई भी चीज जो ईमान को हिलाएं
    जमीन तो होनी ही नही चाहिए

    बस चारों तरफ धुंआ ही धुंआ हो
    क्या होता है उजड़ना
    क्या होता है मौसम खिजाओं का,पता ना चले
    दूर दूर तक हरियाली छाई हो

    हर तरफ बस महकी फिजा हो
    हर रोज होने चाहिए
    परमात्मा के दर्शन कम से कम उस जगह की
    ऐसी तो सुबह हो हर दिल में सिर्फ भरी हो सच्चाई

    अपने जुर्मो का खुद इंसान ही गवाह हो
    चूर ना हो लोग जहां के धन दौलत, रूपये पैसे में
    हर एक आंख में सिर्फ मानवता का नशा हो
    नही होनी चाहिए जाति पाति भेदभाव किसी से भी

    हर दिल मे एक जैसा देवता बसा हो
    कद्र हो जहां रिश्तों की
    लोग समझते हो एक दुजे को
    कोई भी जहां अंहकार के कीचड़ में ना धसा हो

    किसी ने कहा:- भाई जमीन पर आ जाओ
    क्यूं मजाक करते हो, तुम कहां हो
    मैने कहा:- नाश उसका अभी के अभी हो जाए
    जो मेरी हसरतों पर जरा भी हंसा हो

    नीरज रतन बंसल 'पत्थर'

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